किसान समुदाय कोरोना वारियर्स की प्रमुख भूमिका में!

हम किसान कौम से है जो सदियों से देश सेवा ही करते आये है फिर चाहे वह बॉर्डर हो या फिर देश के भीतर कभी भी बलिदान देने से पीछे नही हटते,,,और शायद यही कारण है कि हमलोगों को सच ही पसन्द है फिर चाहे वह सच अपनी ही खिलाफत क्यो न करता हो, कभी भी अपने कर्तव्यों से पीछे नही हटते चाहे क्यो न अपने ऊपर ही आफत आ जाये!

वर्तमान में फैली कोरोना जैसी महामारी इस वक्त विश्व समुदाय के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन खड़ी है और जबकि भारत मे इस महामारी ने दस्तखत दिया तो यहां भी संक्रमण के खतरे को देखते हुए शासन प्रशासन सावधानियां बरतने के लिए lockdown से लेकर सामूहिक कयावद को तीतर बितर रहने का आदेश जारी किया और लोगो से समूह में न रहने के लिए अपील भी किया।
अब भारत जैसे बड़े लोकतंत्र में पुलिस व्यवस्था सीमित है इसलिए प्रशासन का सहयोग करना भी प्रत्येक भारतीय की जिम्मेदारी बन जाती है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 में वर्णित धर्म की स्वतंत्रता कुछ परिसीमाओं जैसे लोक व्यवस्था, सदाचार और भाग 3 निर्बन्धन के अधीन है अर्थात यह absolute लाइबिलिटी नही है स्वास्थ्य के आधार पर भी इसपर युक्तियुक्त निर्बन्धन लगाया जा सकता है ऐसा हमारा संविधान कहता है फिर भी कुछ लोग समुदाय सामूहिक कयावद में शामिल हो लगातर सम्मेलन कर रहे है जिसमे शुरुआत संसद सत्र से ही हुई,,फिर योगी जी द्वारा रामलला को शिफ्ट कराते हुए शिवराज मामा के सपथ ग्रहण से होते हुए येदुरप्पा द्वारा शादी समारोह तक पहुची तब तक कोई हंगामा नही कोई मुद्दा नही कोई बात नही लेकिन जैसे ही उसके बाद बात पहुची तब्लीकि मरकज जमात तक पर तो वही पर असली सम्मेलन का मसाला मिला मीडिया को,सरकार को और एक विशेष विचारधारा के लोगो को,,,जबकि LIO और विदेशी एम्बेसी को प्रत्येक विदेशी की खबर होती है जो देश के अंदर होता है इसपर जोर नही दिया गया,,,प्रशासन को भी आगाह कराया गया bt इसपर भी कोई प्रतिक्रिया नही व्यक्त की गई। ये तो रही आम बात जो सब जानते है,,,
अब हम बात अपनी करते है,,, चुकी हम वर्तमान मीडिया सरकार व उसके जाल में फंसे लोगों के सोच के स्तर से बखूबी वाकिफ है इसलिए हमें खुद चौकन्ना रहना चाहिए, दूसरी बात प्रशासन जब अनदेखी किया तो वर्तमान में अभिव्यक्ति के शानदार साधन & माध्यम से आप अपनी बात को कह सकते थे अर्थात ऐसा न करके आपने अपने कर्तव्यों से मुंह ही नही मोड़ा बल्कि प्रशासन को लिखे पत्र को अपनी बचाव के लिए भविष्य में आगे प्रदर्शित करना और जिम्मेदारी प्रशासन पर फोड़ने का बहाना पाकर आप अपने काम मे मशगूल रहे,,,और अपने कर्तव्यों को नजरअंदाज किये।
हम किसान कौम से है इसलिए हमें सच कहने में कोई हिचक नही होना चाहिए जबकि अब आप अपने कर्तव्यों का पालन करने में असफल रहे है और साथ ही जबकि हम जानते है कि शासन प्रशासन सब एक खास विचारधारा वाले समुदाय से वर्तमान में प्रभावित है और मुस्लिम धर्म ही उनकी राजनीति का आधार है तो आपके सम्मेलन से पहले हुए सम्मेलनों के लिए भी कार्यवाही होनी चाहिए और मुद्दा भी बनना चाहिए जिसमें येदुरप्पा,योगी जी और मामा जी पर भी fir दर्ज होनी चाहिए bt आप और हम पीछे ऐसे बहुत सारी बाते और खुराफात देख चुके है जिसमे लोकतंत्र कहे जाने वाले भारत मे राजशाही व्यवस्था प्रतीत हुई है और सत्ता के नजदीक रहने वाले लोगो पर कोई कार्यवाही नही हुई इसलिए आज आप मरकज में हुए सम्मेलन के लिए स्वयं को जिम्मेदार मानिए और उनका विरोध कर बहिष्कार करिये क्योकि सत्ताधारी बेहयाई और थेथरई को ही अपना कर्तव्य समझते है और अगर आप गधे के मुंह से घोड़े की आवाज की अपेक्षा रखते है तो आप ही गलत है।।।
अपितु आप इसके आड़ में ऊपर के मुद्दों को उठाकर इसे छिपा नही सकते क्योकि सत्ताधारी नाजायज लोग है और आप कोई ऐसा मौका ही न दीजिये जिससे उन्हें कोई मुद्दा मिलने का अंदेशा हो,,,आप दोष का प्रतिरोपण करके अपनी गलतियों को छुपा नही सकते।
और हा वर्तमान में मुस्लिम समुदाय के लोग इस तरह के सम्मेलन करने वालो को धर्म से बहिष्कृत करे उनका बहिष्कार करें और ऐसे लोग के कारण सम्पूर्ण इस्लाम को सन्देह के नजरिया न बनने दे जो देश के लिए सहयोग करने के बजाय उसमे जहर घोलने का काम कर रहे है।
मरकज में शामिल लोग को चिन्हित कर उनकी मदद बिल्कुल न करे बल्कि देश हित मे सहयोग करे।
कुछ लोग विशेष के कारण सम्पूर्ण धर्म को निशाना नही बनाया जा सकता बीमारी की कोई जात धर्म नही होती और अब जब ऐसी परिस्थितिया सामने आ रही है तो समुदाय के अन्य लोग ऐसे लोग जो देशहित के खिलाफ कार्य करे चाहे ड्रम के नाम पर या किसी अन्य को आधार बनाकर तो उनको धार्मिक न माने बल्कि उनका विरोध कर उन्हें धर्म का दुश्मन माने,,,।।।
संघी संस्कृति ही रही है दुसरो के घरों में झांकने की इसलिए इसे बहुत दिल पर लेने की जरूरत नही ये हमेशा अपना इल्जाम दुसरो पर ही लगाते है।

एक मेरा खास सुझाव धर्म की स्वतंत्रता भारतीय नागरिक तक ही सीमित हो तो ठीक है अर्थात इन्हें पूर्ण स्वतंत्रता हो bt बाहरी विदेशी लोग जो धर्म के नाम पर या प्रचार प्रसार के लिए भारत आते है उनके लिए पूर्णतः प्रतिबन्ध तो नही लेकिन एक सीमित स्तर तक रखने के लिए समुचित विधान बनाया जाना चाहिए।।।
मैं व्यक्तिगत तौर पर वैज्ञानिक और मानवीय तरीके से जुड़े पहलू को ही तवज्जो देता हूं।

सौरभ कबीर,
लॉ रिसर्च स्कॉलर,

DDU,गोरखपुर

शेफर्ड उमाशंकर की तत्कालीन टिप्पणियां एवं सन्देश आमजनों के लिए!

देश में उत्तर भारतीय किसान पशुपालक कामगार समुदाय ही सबसे ज्यादा पाखंडी लुटेरी संस्कृति के मानसिक गुलाम हैं,जबकि इनकी असल संस्कृति “द्रविड़” है!मगर ये “हिंदुत्व” ढोकर अपमान,तिरस्कार,अन्याय सह रहे हैं!

तुम मुझे “इलेक्टोरल बॉन्ड” दो, मैं तुम्हे सरकारी कम्पनी खरीदने व बैंक कर्ज को एन पी ए में डाल बैंक बन्द करवा दूंगा!

न बैंक रहेगा,न वसूली होगी!

जय जय छिला आम

जय जय छिली इमली

सोच लो,इसी कारण आज तक उच्च न्याय व्यवस्था में वंचित शोषित समाज को प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा।

इसी सोच के कारण ही आज सभी सार्वजनिक सरकारी उपक्रमों को बेचा जा रहा।

उच्च शिक्षा को बर्बाद करने का कारण यही ब्राह्मण जातिवादी वायरस है,जो खुलेआम बेईमानी करता है।

सुना है,कई बैंकें डूब चुकी,कुछ डूबने वाली,सरकार लगातार सार्वजनिक उपक्रम बेचती जा रही!

दूसरी ओर “इलेक्टोरल बॉन्ड” के रूप में सबसे ज्यादा चंदा भाजपा को मिला?

चन्दा लेकर डुबकी – बिक्री का खेल चालू!!

जोर से बोलो –

जय जय छिला आम

जय जय छिली इमली

डियर कुर्सी लोलूप मंत्री!

जय श्री राम को लेकर आप सबसे ज्यादा मुखर रहते हैं।

मगर जब सरे मंच आपका हाथ एक हिन्दू झटक देता,सरे महफ़िल कुर्सियों के बीच स्टूल पर तुमको बैठाया जाता है,घेर कर तुम्हारे ही राम भक्त तुमको गालियां देते हैं,

तब भी तुम्हारा जमीर नहीं जागता?

तुम्हारा आत्म स्वाभिमान करवट नहीं लेता?

पिछड़ों के नेता बनते ही पिछड़ों के शिक्षा,रोजगार,नौकरी, आरक्षण सब छिनता जा रहा,मिटाया जा रहा!

तुम्हारी आवाज़ नहीं निकलती?

कुर्सी व पद व पैसे के लिए आत्म सम्मान बेच चुके आदमी की कोई कद्र उसका समाज भी नहीं करता,अगर स्वाभिमान जिंदा हो।

स्वाभिमान बेचकर कुर्सी का अलौकिक आनन्द लेता रह!

लतिहड़ आदमी कहीं का।

#मौर्य_सम्राट?

#के_पी_मर्वैया

जय पेरियार।

बैंकें डूब नहीं रहीं,

बल्कि डुबाई जा रही हैं सत्ता व कार्पोरेट के गठजोड़ की लूटेरी साज़िश से!

सत्ता संस्थान,न्याय संस्थान व लुटेरे कार्पोरेट की मिलीभगत?

जनता जय छिली आम के जयकारे में मस्त!!

वो कभी सिक्खों का नर संहार कराते हैं!

वो कभी मुस्लिमों का नरसंहार कराते हैं!

वो कभी आदिवासियों का नरसंहार कराते हैं!

वो कभी जाटों पर अत्याचार/हत्याएं कराते हैं!

वो कभी गुज्जरों पर अत्याचार/हत्याएं कराते हैं!

वो कभी इसाइयों पर अत्याचार/हत्याएं कराते हैं!

वो कभी अनु0जाति,अछूतों की हत्याएं,उत्पीड़न कराते हैं!

वो कभी पिछड़ों पर अत्याचार,शुद्धिकरण के नाम पर सामाजिक अपमान,हक मांगने पर हाथ पैर तुड़वाते है!

वो कभी किसानों पर बर्बर लाठीचार्ज,गोलीचार्ज करवाते हैं!!

वो बेशर्मी से बलात्कारियों,दंगाइयों,हत्यारों का समर्थन करते हैं!

वो कुटिलता के साथ संविधान को जनता की नजर में फेल प्रचारित करने का एजेंडा चलाते हैं!

वो संविधान की सामाजिक समता की सोच को मिटाना चाहते हैं!

वो समाज में जाति वर्ण,भेदभाव,छुआछूत,ऊंच नीच,अत्याचार,अन्याय,लूट,पाखंड,बलात्कार,हत्याएं बनाए रखना चाहते!

मुख्य बात

“वो” जो ये सब करवा रहा है,उसकी कोई औकात नहीं है ये सब करने की।

वो जिनके खिलाफ ये सब करवाता है,इन्हीं के बीच से कुछ दलाल,बिकाऊ,पदलोलुप,स्वार्थी,गद्दार,महत्वाकांक्षी,कुंठित,

बेईमान,चापलूस रूपी “औजार” चुन लिए हैं,इन्हीं की ताकत के दम पर सत्ता व्यवस्था – संस्थानों पर कब्जा करके इनके ही समुदायों,वर्गो का दमन कर रहा।

इस “वो” और इसके दलालों को जिस दिन लोग जान समझ लेंगे,इनकी गुलामी छोड़,इनका बहिष्कार कर देंगे,उसी दिन से ही बदलाव आना शुरु होगा।

वोट हमारा,मुद्दे हमारे,नेता हमारे समाज का हो।

हमारे मुद्दे होने चाहिए-

जातीय जनगणना।

बैकलॉग भर्ती।

निजी सेक्टर व् उच्च न्याय व्यवस्था में प्रतिनिधित्व।

किसान आयोग।

मण्डल कमीशन का पूर्ण क्रियान्यवन,प्रतिनिधित्व/आरक्षण को बार बार मिटाने की कोशिश करने वालों से बचाने के लिए “प्रतिनिधित्व संरक्षण-क्रियान्यवन व् अनुपालन अधि0” का गठन।

शिक्षा व् चिकित्सा सेवा को सस्ता और निजी सेक्टर से बाहर हो।

निजी करण पर रोक।

सरकारी उपक्रमों-विभागों में आउटसोर्सिंग को बन्द करके ठेकेदारी खत्म की जाय।

शिक्षा को मुफ़्त किया जाय।

विश्विद्यालयों में शिक्षकों की कमी पूरा करने के लिए त्वरित भर्ती किया जाये।आदि आदि इन्ही मुद्दों को ध्यान में रखना है।अपने नेताओं से सवाल करो,उनसे इन मुद्दों पर उनकी प्रतिबद्धता पूछो।

सनद रहे।

गंगा,गाय,मन्दिर-मस्जिद,लव जेहाद,दीपोत्सव,तीर्थ यात्रा जैसे तमाम पाखण्डी-अन्धविस्वासी बनाने वाले,आर्थिक नुक्सान पहुंचाने वाले,मानसिक गुलाम बनाने वाले हमारे मुद्दे नही,और न इन पर वोट देना चाहिए।

सोचो पिछड़ों,अ0जा0,ज0जा0 वालों!तुम्हारी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है।

जय कृष्णासुर

जय पेरियार

जय भीम

जय मण्डल

जय जवान

जय किसान

जय विज्ञान

जय संविधान।

पलाद का रत्तिव भर आंचौ नाही लागि, डैनेवा जलि मरी??

धत तेरे झूठों की!!

असली शब्द है होरी,होरी किसानों की फसल खुशी का त्योहार है,जिसमे सामूहिक रूप से इकट्ठे होकर अधपकी फसल की बालियों को भूनकर खाया जाता है।

बाकी सब कहानी है।

होलिका दहन नारी अपमान व नारी पर क्रूरता का प्रतीक है,इसका बहिष्कार किया जाना चाहिए।

भाजपा अगर ब्राह्मण नियंत्रित दल है,तो आम आदमी पार्टी बनिया नियंत्रित दल।

देश की राजनीति को ब्राह्मण व बनिया समुदाय ही परोच्छ रूप से नियंत्रित व प्रभावित करते हैं।

बाकी सब इन्हीं दोनों समुदायों के आगे उठा बैठक करते हैं!

साम,दाम,दंड,भेद की नीति चलती रहती है खुलकर।।

जो ससुरे मेहनतकशों पर “टोंटी चोर” “चारा चोर” का फर्जी आरोप लगाते आए हैं,पता चला कि ये असल में “हरामखोर” “टॉयलेट चोर” “चंदा चोर” हैं?

अपना गुनाह छुपाने के लिए दूसरों पर आरोप लगाना इनकी आदत है??

पिछड़े वर्ग की जातियों की जितनी भी स्वघोषित सेनाएं/संगठन हैं,वे सब मिलकर पिछड़ों के अंदर संवैधानिक चेतना,वर्गीय एकता व सांस्कृतिक क्रांति पैदा करने का काम करें।तभी आधुनिक भगवान “नेता” सही लाइन पर आएंगे।

तुम्हारा सोशल मीडिया में बोला गया झूठ उजागर हुआ,तो सोशल मीडिया छोड़ने की बात कर रहे हो!

सरकार में रहते घोर जनविरोधी किए कामों का विरोध देखते हुए कुर्सी कब छोड़ोगे???

योग्य लोगों की कमी नहीं है।

जातिगत जनगणना का डाटा न होने के कारण ही बजट में सभी वर्गों के विकास के लिए योजनाएं नहीं बन पाती हैं।अनुत्पादक कामों को विकास कार्य बताकर गुमराह किया जाता है।धोखाधड़ी लूट को जातीय जनगणना कराकर बन्द किया जाय।

अमा कुर्सी छोड़ दे भाई,

बड़ा एहसान होगा नागरिकों पर।

जब व्यक्ति की मर्यादा का,

मानवाधिकार मूल्यों का,

नैसर्गिक न्याय का

द्वेष लोभ मोह के वशीभूत होकर निरंतर अनादर करने वालों का खुले/छिपे तौर से लगातार संरक्षण – समर्थन किया जाएगा,

तो इन सबके जिम्मेदार किसी व्यक्ति या संस्थान की मर्यादा नहीं बचेगी।

फिर चाहे

न्याय व्यवस्था हो,या सत्ता व्यवस्था,सवाल के घेरे में आएंगे ही।

जातिवार जनगणना

देशहित में नहीं? या ब्राह्मण हित में नहीं??

कहने को भिक्षा भोगी,कब्जाए दूसरों का हिस्सा!

जातिगत जनगणना बहुत जरूरी,

तभी होगी हर वर्ग की इच्छा पूरी।।

जोर से बोलो –

जय कृष्णासुर

जय महिषासुर

जय पेरियार

जब तक हम जाति जाति चिल्लायेंगे,

जब तक हम अपनी अपनी जाति के विधायक सांसदों की संख्या गिनेंगे,

जब तक हम ठग धूर्त संस्कृति के फर्जी ग्रंथो में लिखे भगवानों के वंश से अपने को जोड़कर गौरवान्वित होंगे,

जब तक हम किसान पशुपालक जातियों में एक दूसरे को ऊंचा नीचा मानेंगे,

जब तक हम अपने संवैधानिक हक से अनजान,इनको पाने के बजाय अपनी अपनी जाति के विधायक सांसद चुनने को विकास मानेंगे,

जब तक हम फर्जी पाखंड अंध विश्वास में फंस कर भाग्यवादी,कर्मकांडी मानसिक गुलाम बने रहेंगे,

जब तक हम अपने धन को शिक्षा,स्वास्थ्य,रोजगार पर खर्च करने के बजाय पाखंड कांवड़ तीर्थ यात्रा भंडारा जागरण जैसे फालतू के कामों पर खर्च करेंगे,

जब तक हम अपनी अपनी जाति के बेईमान स्वार्थी कायर नेताओं का आंकलन किए बिना उनको मसीहा मानकर पूजते रहेंगे,

तब तक कुछ नहीं बदलने वाला।

सामाजिक सांस्कृतिक क्रांति की जरूरत,आत्म सम्मान आंदोलन होना चाहिए।

जय जय पेरियार।

पिछड़े वर्ग को आज जोतिबा फुले,रामा सामी पेरियार,राम स्वरूप वर्मा,ललाई यादव,महराज भारती,जगदेव कुशवाहा की विचारधारा को अपनाने की जरूरत है।

दूसरी कोई विचारधारा इनके हक हुकूक नहीं दिला सकती।इनको अपनाए बगैर असफल रहेंगे।

पिछड़ों दलितों!

कौन हैं वे लोग जो तुम्हे हिन्दू के नाम पर वोटर,धर्म सैनिक,सांस्कृतिक गुलाम व बाबू बनाए रखना चाहते।

मगर यही लोग तुम्हे

प्रो0 – जज – उद्योगपति – कुलपति – न्याय मूर्ति – एस पी – डी एम नहीं बनने देना चाहते।

प्रतिनिधित्व/आरक्षण के विरोध में रिट याचिकाएं यही करवाते हैं!

जहां,जिस संस्थान,जिस विभाग,जिस उपक्रम में प्रतिनिधित्व मिला हुआ है,उसे मिटा रहे या उस उपक्रम को ही बेंच कर निजी हाथों में सौंप दे रहे।क्योंकि निजी सेक्टर में प्रतिनिधित्व का कानून लागू ही नहीं किया गया जानबूझकर।

सोचो,क्या करना है।

जितने भी सिरी सिरी,420,840,1680,3360,108,1008,10008,स्वामी,बापू, अम्मा,बुआ,भौजी,बहना,भैया नाम वाले “दिव्य” अवतारी महामानव हैं,देश हित में इनसे उचित दूरी बनाए रखे!कब आपको ब्रेन वाश करके,गुलाम बना लें!!!

जनकवि रमाशंकर यादव विद्रोही का जन्मदिन!

आज हमारे प्रिय जनकवि रमाशंकर यादव “विद्रोही” का जन्मदिन है| हमेशा कमेरों, शोषितों और वंचितों के हकों में अपनी बेबाक आवाज को बुलंद करने वाले, हर आंदोलन के साथी और सहभागी विद्रोही जी को जन्मदिन पर क्रांतिकारी सलाम|

जनकवि विद्रोही आप जेएनयू और देश के छात्रों, युवाओं व सैकड़ों देशवासियों के अरमानों में अमर हो| आपने जैसा सोचा वैसा ही जीवन जिया| सुकरात और कबीर की परंपरा को एक कदम आगे बढ़ कर अपनाया और मजबूत किया|

आज एक दो विश्वविद्यालयों में तुम्हारी कमेरों की पीढ़ी समाज में तुम्हारे योगदान और भूमिका पर शोध कर रही है| तुम कल तक जन जन के बीच थे लेकिन आज वंचितों द्वारा लिखे जा रहे इबारत में तुम तथाकथित सर्वशक्तिमान ईश्वर को चुनौती देकर कर उखाड़ फेंकने वाले महान हीरो हो गए हो|

यही तो दर्द है JNU वालों ने खेत खलियान मजदूर आदिवासियों को बागी कलम पकड़ना सीखा दिया।

Mulayam Singh Yadav

कुत्ता पालक शालिनी अग्रवाल गौपालक यादवों से क्यों जलती है!!

शालिनी अग्रवाल को पता है कि यादव अभी सॉफ़्ट टार्गेट हैं!

इससे ज़्यादा कुछ नही
कुछ points बता रहा हूँ टाइमलाइन पे लगायें

•उन्हें गाली न दें

•सक्षम लोग इनके NGO पे और उनकी income पे टार्गेट करें

•उन्होंने लास्ट कितनी fir करवाई है और पीड़ितों में क्या समानता है इसे चेक करे

•गाय को पानी पिलाती है तो लाइव आती हैं जब ऑफ़्लाइन होती है फिर गाय के साथ क्या करती है ?

•छोटे बालक को ट्रक के नीचे आने की धमकी देती हैं
सम्भव हो तो चाइल्ड अब्यूस का केस करें…

•आज तमीज़ सिखा रही है, गौरी लंकेश पे क्या बोली थी ये भी देखिए

•अभी सरकार ने कई सारे NGO के लाइसेंस रद्द किए थे, क्या इसका NGO उसके बाद का है ?
पहले का है तो बचा कैसे ?

•NGO फ़ंड से कितनी गाय इंपोर्ट/इक्स्पॉर्ट करती हैं ये भी देखिए

•Unknown no से धमकी की बात कर रही हैं, इन आरोपों की जाँच कराई जाय, ग़लत निकलने पर कार्यवाही की जाय

•इनकी सारी हेट स्पीच चेक की जाय

और

•एक जाँच तो इनकी डिग्री की भी बनती है!

हिन्दू की हत्या का क्या अर्थ है!!

ब्रजपाल मौर्या की हत्या हुई…. हिंदू धर्म खतरे में नहीं आया….
सुमित गुज्जर की हत्या हुई….हिंदू धर्म खतरे में नहीं आया…
मुकेश राजभर की हत्या हुई ….हिंदू धर्म खतरे में नहीं आया….
पुष्पेंद्र यादव की हत्या हुई….हिंदू धर्म खतरे में नहीं आया…
प्रदीप तोमर की हत्या हुई…हिंदू धर्म खतरे में नहीं आया…।।

इलाहाबाद में पटेल युवक की हत्या कर दी गई…. हिंदू धर्म खतरे में नहीं आया….

गोरखपुर में अशोक निषाद की हत्या हुई ….हिंदू धर्म खतरे में नही आया…।।

पर जैसे ही ….कबीर तिवारी और कमलेश तिवारी की हत्या हुई…..हिंदू धर्म खतरे में आ गया….।।

टीबी पर कितने लोगों की मां और पत्नी की फोटो आपने देखी हैं।।

क्या मरने वाले सभी भारत के नागरिक नहीं है…..।। क्या मरने वाले सभी हिंदू नहीं है।। तो मीडिया, पुलिस और सरकार मरने वालों के साथ इतना भेदभाव क्यों कर रही है ?

Sobaran kabir

Manoj Yadav