
हम किसान कौम से है जो सदियों से देश सेवा ही करते आये है फिर चाहे वह बॉर्डर हो या फिर देश के भीतर कभी भी बलिदान देने से पीछे नही हटते,,,और शायद यही कारण है कि हमलोगों को सच ही पसन्द है फिर चाहे वह सच अपनी ही खिलाफत क्यो न करता हो, कभी भी अपने कर्तव्यों से पीछे नही हटते चाहे क्यो न अपने ऊपर ही आफत आ जाये!
वर्तमान में फैली कोरोना जैसी महामारी इस वक्त विश्व समुदाय के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन खड़ी है और जबकि भारत मे इस महामारी ने दस्तखत दिया तो यहां भी संक्रमण के खतरे को देखते हुए शासन प्रशासन सावधानियां बरतने के लिए lockdown से लेकर सामूहिक कयावद को तीतर बितर रहने का आदेश जारी किया और लोगो से समूह में न रहने के लिए अपील भी किया।
अब भारत जैसे बड़े लोकतंत्र में पुलिस व्यवस्था सीमित है इसलिए प्रशासन का सहयोग करना भी प्रत्येक भारतीय की जिम्मेदारी बन जाती है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 में वर्णित धर्म की स्वतंत्रता कुछ परिसीमाओं जैसे लोक व्यवस्था, सदाचार और भाग 3 निर्बन्धन के अधीन है अर्थात यह absolute लाइबिलिटी नही है स्वास्थ्य के आधार पर भी इसपर युक्तियुक्त निर्बन्धन लगाया जा सकता है ऐसा हमारा संविधान कहता है फिर भी कुछ लोग समुदाय सामूहिक कयावद में शामिल हो लगातर सम्मेलन कर रहे है जिसमे शुरुआत संसद सत्र से ही हुई,,फिर योगी जी द्वारा रामलला को शिफ्ट कराते हुए शिवराज मामा के सपथ ग्रहण से होते हुए येदुरप्पा द्वारा शादी समारोह तक पहुची तब तक कोई हंगामा नही कोई मुद्दा नही कोई बात नही लेकिन जैसे ही उसके बाद बात पहुची तब्लीकि मरकज जमात तक पर तो वही पर असली सम्मेलन का मसाला मिला मीडिया को,सरकार को और एक विशेष विचारधारा के लोगो को,,,जबकि LIO और विदेशी एम्बेसी को प्रत्येक विदेशी की खबर होती है जो देश के अंदर होता है इसपर जोर नही दिया गया,,,प्रशासन को भी आगाह कराया गया bt इसपर भी कोई प्रतिक्रिया नही व्यक्त की गई। ये तो रही आम बात जो सब जानते है,,,
अब हम बात अपनी करते है,,, चुकी हम वर्तमान मीडिया सरकार व उसके जाल में फंसे लोगों के सोच के स्तर से बखूबी वाकिफ है इसलिए हमें खुद चौकन्ना रहना चाहिए, दूसरी बात प्रशासन जब अनदेखी किया तो वर्तमान में अभिव्यक्ति के शानदार साधन & माध्यम से आप अपनी बात को कह सकते थे अर्थात ऐसा न करके आपने अपने कर्तव्यों से मुंह ही नही मोड़ा बल्कि प्रशासन को लिखे पत्र को अपनी बचाव के लिए भविष्य में आगे प्रदर्शित करना और जिम्मेदारी प्रशासन पर फोड़ने का बहाना पाकर आप अपने काम मे मशगूल रहे,,,और अपने कर्तव्यों को नजरअंदाज किये।
हम किसान कौम से है इसलिए हमें सच कहने में कोई हिचक नही होना चाहिए जबकि अब आप अपने कर्तव्यों का पालन करने में असफल रहे है और साथ ही जबकि हम जानते है कि शासन प्रशासन सब एक खास विचारधारा वाले समुदाय से वर्तमान में प्रभावित है और मुस्लिम धर्म ही उनकी राजनीति का आधार है तो आपके सम्मेलन से पहले हुए सम्मेलनों के लिए भी कार्यवाही होनी चाहिए और मुद्दा भी बनना चाहिए जिसमें येदुरप्पा,योगी जी और मामा जी पर भी fir दर्ज होनी चाहिए bt आप और हम पीछे ऐसे बहुत सारी बाते और खुराफात देख चुके है जिसमे लोकतंत्र कहे जाने वाले भारत मे राजशाही व्यवस्था प्रतीत हुई है और सत्ता के नजदीक रहने वाले लोगो पर कोई कार्यवाही नही हुई इसलिए आज आप मरकज में हुए सम्मेलन के लिए स्वयं को जिम्मेदार मानिए और उनका विरोध कर बहिष्कार करिये क्योकि सत्ताधारी बेहयाई और थेथरई को ही अपना कर्तव्य समझते है और अगर आप गधे के मुंह से घोड़े की आवाज की अपेक्षा रखते है तो आप ही गलत है।।।
अपितु आप इसके आड़ में ऊपर के मुद्दों को उठाकर इसे छिपा नही सकते क्योकि सत्ताधारी नाजायज लोग है और आप कोई ऐसा मौका ही न दीजिये जिससे उन्हें कोई मुद्दा मिलने का अंदेशा हो,,,आप दोष का प्रतिरोपण करके अपनी गलतियों को छुपा नही सकते।
और हा वर्तमान में मुस्लिम समुदाय के लोग इस तरह के सम्मेलन करने वालो को धर्म से बहिष्कृत करे उनका बहिष्कार करें और ऐसे लोग के कारण सम्पूर्ण इस्लाम को सन्देह के नजरिया न बनने दे जो देश के लिए सहयोग करने के बजाय उसमे जहर घोलने का काम कर रहे है।
मरकज में शामिल लोग को चिन्हित कर उनकी मदद बिल्कुल न करे बल्कि देश हित मे सहयोग करे।
कुछ लोग विशेष के कारण सम्पूर्ण धर्म को निशाना नही बनाया जा सकता बीमारी की कोई जात धर्म नही होती और अब जब ऐसी परिस्थितिया सामने आ रही है तो समुदाय के अन्य लोग ऐसे लोग जो देशहित के खिलाफ कार्य करे चाहे ड्रम के नाम पर या किसी अन्य को आधार बनाकर तो उनको धार्मिक न माने बल्कि उनका विरोध कर उन्हें धर्म का दुश्मन माने,,,।।।
संघी संस्कृति ही रही है दुसरो के घरों में झांकने की इसलिए इसे बहुत दिल पर लेने की जरूरत नही ये हमेशा अपना इल्जाम दुसरो पर ही लगाते है।
एक मेरा खास सुझाव धर्म की स्वतंत्रता भारतीय नागरिक तक ही सीमित हो तो ठीक है अर्थात इन्हें पूर्ण स्वतंत्रता हो bt बाहरी विदेशी लोग जो धर्म के नाम पर या प्रचार प्रसार के लिए भारत आते है उनके लिए पूर्णतः प्रतिबन्ध तो नही लेकिन एक सीमित स्तर तक रखने के लिए समुचित विधान बनाया जाना चाहिए।।।
मैं व्यक्तिगत तौर पर वैज्ञानिक और मानवीय तरीके से जुड़े पहलू को ही तवज्जो देता हूं।
सौरभ कबीर,
लॉ रिसर्च स्कॉलर,
DDU,गोरखपुर




